Ye Khamoshi Ye Jhuki Nazar | Original Ghazal | Raghav Joshi | Sajeev Sarathie | Soulful Love Story
राहुल, उत्तराखंड की पहाड़ियों में पला-बढ़ा एक साधारण लड़का, आज दिल्ली की कॉर्पोरेट ज़िंदगी में जी रहा है। शहर की तेज़ रफ्तार के बीच भी उसके भीतर पहाड़ों की सादगी बाकी है।
एक दिन वह अपने दोस्त की बहन की शादी में शामिल होने एक पहाड़ी गाँव जाता है।
शादी का घर रंगों, शोर और खुशियों से भरा है। लेकिन उसी भीड़ में राहुल की नज़र एक लड़की पर ठहर जाती है - वंदना।
वह सबसे अलग है। न ज़्यादा बोलती है, न हँसती है… बस एक गहरी खामोशी में रहती है। राहुल को लगता है वह दुनिया से कटी हुई है, लेकिन धीरे-धीरे वही खामोशी उसे अपनी ओर खींचने लगती है।
फिर एक दिन सच सामने आता है - वंदना न सुन सकती है, न बोल सकती है।
दोस्त उसे समझाता है कि ये रास्ता आसान नहीं होगा, परिवार भी शायद कभी न माने। लेकिन राहुल के लिए अब ये बातें मायने नहीं रखतीं। उसके लिए किसी की कमी नहीं, उसका व्यक्तित्व मायने रखता है।
जब राहुल अपने दिल की बात वंदना से कहता है, तो वह मना कर देती है। कहती है -उसे एक “सामान्य” लड़की के साथ जीवन बिताना चाहिए। तब राहुल उससे पूछता है “अगर मैं ऐसा होता… और फिर भी आपको मुझसे प्यार हो जाता, तो क्या आप मुझे ठुकरा देतीं?”
वंदना के पास जवाब नहीं होता। वह एक शर्त रखती है - अगर राहुल सच में गंभीर है, तो उसे 6 महीनों में सांकेतिक भाषा सीखनी होगी।
राहुल कहता है -“छह महीने क्यों… मैं दो हफ्तों में सीख जाऊँगा।”
इसी दौरान वह अपने तलाकशुदा चाचू से बात करता है। चाचू उसे समझाते हैं कि रिश्ते सोच-समझकर बनाने चाहिए। तब राहुल शांत स्वर में कहता है—
“चाचू, आजकल ज़्यादातर शादियाँ रिश्ते कम और सौदेबाज़ी ज़्यादा लगती हैं।
लड़की वाले लड़के की कमाई और नौकरी देखते हैं, और उसी के हिसाब से उसका मूल्य तय होता है।
लड़के वाले लड़की की सादगी, संस्कार और घर संभालने की क्षमता तौलते हैं।
फिर दहेज, समाज और हैसियत के बीच कहीं एक समझौता हो जाता है… और उसी को रिश्ता कह दिया जाता है।
लेकिन मैं ऐसा रिश्ता नहीं चाहता जिसमें बस समझौते हों।
मैं उस इंसान के साथ जीवन बिताना चाहता हूँ जिसे मैंने खुद चुना हो।
आगे सुख मिले या दुख… फैसला मेरा होगा।
और चाचू, आपका रिश्ता भी तो सब देख-भाल कर ही हुआ था…
फिर भी टिक नहीं पाया।
मुझे नहीं पता मेरा और वंदना का रिश्ता कितना सफल होगा…
पर कम से कम ये तसल्ली रहेगी कि ये फैसला मेरा अपना था।”
राहुल की ये बात सिर्फ चाचू ही नहीं, उसके परिवार को भी सोचने पर मजबूर कर देती है।
कुछ समय बाद, राहुल उस स्कूल पहुँचता है जहाँ वंदना मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाती है। पूरे स्कूल के सामने, वह पहली बार साइन लैंग्वेज में अपने दिल की बात कहता है।
उसकी खामोश उँगलियाँ जब शब्द बनती हैं… तो वहाँ मौजूद हर दिल उन्हें महसूस करता है।
और उस दिन… खामोशी के बीच, दो दिल एक-दूसरे की भाषा समझ लेते हैं।
कुछ खामोशियाँ… लफ़्ज़ों से ज़्यादा बोलती हैं।
उसी खामोशी को मैंने एक ग़ज़ल में ढालने की कोशिश की है
“Ye Khamoshi Ye Jhuki Nazar” ❤️
आज रिलीज़ हुई है…
उम्मीद है आप इसे महसूस करेंगे।
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"Some silences speak… and some eyes say everything that words never can."
"Ye Khamoshi" is a soulful original ghazal that captures the beauty of unspoken emotions, silent love, and the feelings that live quietly within the heart.
This marks my first ghazal of this session, a heartfelt attempt to keep the essence of classical ghazal alive in today’s world, while connecting it with modern listeners.
This song is for everyone who has ever loved someone silently - without confessing, without expressing… just feeling.
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✨ Credits:
Lyrics / Composition: Sajeev Sarathie
Vocals: Raghav Joshi
Music Production: RS2M
Mix & Master: Deepak Kamal
Video Credit: Shutter Stock
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