ONE WORLD | Love Is The Only Religion | Easter Special Release | Sajeev Sarathie | Rishi S
कहानी: “One World”
केरल के एक शांत से कस्बे में सुबह धीरे-धीरे उतर रही थी।
नारियल के पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप घर के फर्श पर फैल रही थी।
सब कुछ सामान्य था… पर उस घर के अंदर एक अजीब-सी कमी थी।
कृष्णन खिड़की के पास बैठा था।
उसके हाथ में उसके पापा की एक फोटो थी - मुस्कुराते हुए, जैसे वो हमेशा रहते थे।
उसने बिना नज़र हटाए पूछा,
“अम्मा… अच्चा कब आएँगे?”
रसोई में खड़ी उसकी अम्मा कुछ पल के लिए ठिठक गईं।
फिर खुद को संभालते हुए बोलीं,
“जल्दी आएँगे, मोने… बस थोड़ा काम है वहाँ। इसलिए रुके हुए हैं”
कृष्णन ने धीरे से अगला सवाल किया,
“इतना लंबा काम?”
अम्मा अब उसके पास आकर बैठ गईं।
उन्होंने उसके बालों में हाथ फेरा,
“जहाँ अच्चा हैं… वहाँ अभी हालात ठीक नहीं हैं। वहाँ… लड़ाई चल रही है।”
“लड़ाई?”
कृष्णन ने भौंहें सिकोड़ते हुए पूछा,
“लोग लड़ते क्यों हैं, अम्मा?”
अम्मा ने गहरी साँस ली,
“कभी-कभी लोग अपने-अपने धर्म, अपनी मान्यताओं के लिए लड़ने लगते हैं…”
“धर्म?”
कृष्णन ने तुरंत पूछा,
“धर्म क्या होता है, अम्मा?”
अम्मा हल्का-सा मुस्कुराईं, जैसे आसान बनाने की कोशिश कर रही हों,
“धर्म… एक तरीका होता है भगवान को मानने का, मोने।”
कृष्णन ने कुछ पल सोचा, फिर बोला,
“तो क्या भगवान अलग-अलग होते हैं?”
“नाम अलग होते हैं…
पर शायद… भगवान एक ही होता है।”
कृष्णन अब पूरी तरह सवालों में डूब चुका था।
“अगर भगवान एक है…
तो लोग अलग क्यों हैं?”
अम्मा चुप रहीं।
कृष्णन ने फिर पूछा,
“क्या कोई गलत भगवान होता है?”
अम्मा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं, मोने… भगवान गलत नहीं होते…”
“तो लोग गलत होते हैं?”
कृष्णन ने मासूमियत से पूछा।
अम्मा के पास इसका सीधा जवाब नहीं था।
उन्होंने बस उसकी तरफ देखा।
कुछ पल के सन्नाटे के बाद कृष्णन ने धीरे से कहा,
“अम्मा…
अगर सब इंसान एक जैसे हैं…
तो फिर कोई किसी को दुश्मन कैसे बना देता है?”
अब अम्मा की आँखें भर आई थीं।
उन्होंने उसे अपने पास खींच लिया,
“बेटा… कुछ बातें ऐसी होती हैं…
जो समझ में नहीं आतीं…
और शायद उन्हें समझना ज़रूरी भी नहीं होता।”
कृष्णन अब भी सोच रहा था।
उसने बहुत धीरे से, लेकिन साफ आवाज़ में पूछा,
“अम्मा… मुझे कैसे बनना चाहिए?”
अम्मा ने उसकी तरफ देखा।
कृष्णन ने आगे कहा,
“क्या मैं सिर्फ अपने धर्म को मानूँ…
और बाकी लोगों को अलग समझूँ?
या… क्या मैं सबको अपने जैसा मानूँ?”
यह सवाल हवा में ठहर गया।
अम्मा ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया।
उनकी आवाज़ अब बहुत धीमी, लेकिन बेहद साफ थी
“मोने…
तुम जो भी बनो…
सबसे पहले इंसान बनना।
अगर तुम हर इंसान को इंसान की तरह देखोगे…
तो तुम्हारी दुनिया कभी नहीं टूटेगी।”
कृष्णन चुपचाप उन्हें देखता रहा।
तभी फोन की घंटी बजी।
स्क्रीन पर अच्चा का नाम चमक रहा था।
अम्मा ने घबराकर कॉल उठाया।
दूसरी तरफ से आवाज़ आ रही थी - टूटी हुई, काँपती हुई…
पीछे कहीं दूर धमाकों की आवाज़ गूंज रही थी।
“हम… यहाँ फँस गए हैं… हालात बहुत खराब हैं…”
और फिर… कॉल कट गया।
कमरे में सन्नाटा भर गया।
अम्मा के हाथ काँप रहे थे।
उन्होंने धीरे से फोन नीचे रखा…
और बिना कुछ कहे कृष्णन को अपनी बाँहों में कसकर भर लिया।
कृष्णन ने पहली बार अपनी अम्मा को इस तरह टूटते हुए महसूस किया।
उसने कुछ नहीं पूछा।
बस उनकी आँखों में देखा।
उसकी अपनी आँखों में अब सवाल नहीं थे…
बस एक डर था… और एक नई समझ।
उसने अम्मा को और कसकर पकड़ लिया…
जैसे वो उन्हें नहीं…
पूरी दुनिया को संभालने की कोशिश कर रहा हो।
बाहर वही सुबह थी… वही धूप… वही दुनिया।
पर उस छोटे से घर के अंदर,
एक बच्चा यह समझ चुका था कि -
दुनिया एक ही होती है…
बस लोग उसे टुकड़ों में बाँट देते हैं।
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सुनिए One world song इनमें से कोई भी प्लेफॉर्म चुनकर -
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